ये सब कुछ कल रात ही नहीं हुआ; इसकी शुरुआत तब ही हो चुकी थी जब लोगों को पकड़ पकड़ कर bank खाते खुलवाए जा रहे थे, जब लोगों से कहा जा रहा था कि सोने में निवेश करो, जब लोगों से कहा जा रहा था कि सोने के सिक्के खरीदो जब लोगों से कहा जा रहा था कि अपनी आय घोषित करो और सबसे बड़ा इशारा तो times now को दिए साक्षात्कार में दिया था कि 30 सितम्बर तक अवैध कमाई बाहर निकाल दो वरना मैं निकालना जानता हूँ ! मगर हम भारतीय अब सरकार को गम्भीरता से लेना बन्द कर चुके हैं, तो सरकार ने अपनी गम्भीरता दिखा दी तब तो लोगों को जनधन योजना मज़ाक लगी , स्वर्ण मौद्रिकरण योजना मज़ाक लगी, और सबसे बड़ी बात 30 सितम्बर वाली बात मज़ाक लगी और अब अगर आपकी समस्या खातों और बड़ी रकम को लेकर है तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं हैं... देश तो बदल रहा है..कुछ आप भी बदल जाओ
*भारतरत्न डॉ. बाबासाहब ने 80 साल पहीले अपनी किताब 'प्राब्लेम आॅफ रुपी" मे कहा था*
*भष्ट्राचार खत्म करना हो तो हर १० साल मे नोट बदल देनी चाहिए*
: रामराज्य जैसा अनुभव है। जेल खोल दो कोई भागने को तैयार नहीं! तिजोरी खोल दो कोई लूटने को तैयार नहीं।
*भारतरत्न डॉ. बाबासाहब ने 80 साल पहीले अपनी किताब 'प्राब्लेम आॅफ रुपी" मे कहा था*
*भष्ट्राचार खत्म करना हो तो हर १० साल मे नोट बदल देनी चाहिए*
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